भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 440, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें१८६ भारत में अंगरेज़ी राज
मुझसे इलाक़ा लिया। असलियत में मेरे ही नाश के लिए आप फ़ौज रख
रहे थे, क्योकि उसी फ़ौज के हाथों ये सब कार्य हुए हैं x x x इसके
अलावा कई साल से अंगरेज़ गुमाश्तों ने मेरी निज़ामत के अन्दर जो जो
ज़ुल्म और ज़्यादतियों की हैं, जो बड़ी बड़ी रक़में लोगों से ज़बरदस्ती वसूल
की हैं और जो नुक़सान किए हैं मुनासिब और इंसाफ़ यह है कि कम्पनी इस
समय उस सबका हरजाना दे। आपको सिर्फ़ इतनी ही तकलीफ़ करने की
ज़रूरत है कि जिस तरह से बर्धमान और दूसरे इलाक़े आपने लिए थे उसी
तरह मुझपर इनायत करके आप उन्हें वापस लौटा दीजिए।”*
निस्सन्देह मजबूर होकर मीर क़ासिम ने अब कड़ाई का निश्चय
कर लिया।
७ जुलाई को यह पत्र कलकत्ते पहुँचा। उसी रोज़ कलकत्ते की
[हाशिया: मीरजाफ़र के साथ दोबारा साज़िश] अंगरेज़ कौन्सिल की ओर से मीर क़ासिम के साथ युद्ध का एलान प्रकाशित हुआ, जिसमें प्रजा को
यह सूचना दी गई कि मीर क़ासिम की जगह
मीर जाफ़र को अब फिर से बंगाल की मसनद पर बैठा दिया
गया है। नवाब मीर जाफ़र ही के नाम पर बंगाल भर से सेना
जमा की गई और मीर जाफ़र ही के नाम पर प्रजा से अंगरेज़ी
सेना का साथ देने के लिए कहा गया। किन्तु इस बाक़ायदा
एलान से पहले ही पटना विजय हो चुका था और फिर से छिन
भी चुका था। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि कलकत्ते के
अंगरेज़ व्यापारियों की कौन्सिल को बंगाल के सूबेदार को मसनद
- Long's Selections, pp. 325, 326.