सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 439, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 439

मीर क़ासिम १८५

ऐमयाट से खाना खाने के बहाने किनारे पर आने की प्रार्थना की।
ऐमयाट ने इनकार किया और उसकी किश्तियाँ बीच धार से
चलती रहीं। एक दूसरा उच्च कर्मचारी भेजा गया, जिसने किनारे
से फिर कहा कि खाना तैयार है और यदि आप सेनापति मोहम्मद
तक़ी ख़ाँ की प्रार्थना स्वीकार न करेंगे तो उन्हें दुख होगा। ऐमयाट
ने फिर इनकार कर दिया। इसके बाद किनारे के अफ़सरों ने
किश्तियों को रुकने का स्पष्ट हुकुम दिया। जवाब में ऐमगाट ने
वहीं से किनारे की ओर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। नवाब
के आदमियों ने अब ज़बरदस्ती किश्तियों पर पहुँच कर बदला
लिया। उस लड़ाई में ऐमयाट का भी वहीं पर काम तमाम होगया।
२८ जून को मीर क़ासिम ने वन्सीटॉर्ट और उसकी कौन्सिल के
नाम यह पत्र लिखा :—
[हाशिया: मीर क़ासिम की] “ × × × रात को डाकू की तरह मिस्टर एलिस
[हाशिया: प्रजा के साथ ज़ुल्म] ने पटने के क़िले पर हमला किया, वहाँ के बाज़ार को
[हाशिया: और ज़्यादतियाँ] और तमाम व्यापारियों और नगर के लोगों को लूटा
और सुबह से तीसरे पहर तक लूट और क़त्ल जारी रक्खी । × × × चूंकि
आप लोगों ने बेइंसाफ़ी और ज़ुल्म के साथ शहर को रौंद डाला है, लोगों को
बरबाद किया है और कई लाख का माल लूट लिया है, इसलिए अब इंसाफ़
यह है कि कम्पनी ग़रीबों का नुक़सान भर दे, जैसा पहले कलकत्ते में हो
चुका है। आप ईंसाई लोग विचित्र दोस्त निकले। आपने सन्धि की, उस
पर ईसा मसीह के नाम से क़सम खाई। इस शर्त पर कि आपकी सेना सदा
मेरा साथ देगी और मेरी सहायता करेगी, आपने अपनी सेना के ख़र्च के लिए