भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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शब्दों में उसने लिखा कि—"कम्पनी के जो तिलंगे सिपाही सम्राट
और सूबेदार की सहायता के लिए कह कर रक्खे गए थे और
जिनके ख़र्च के लिए मैं कम्पनी को पचास लाख रुपए की ज़मींदारी
दे चुका हूँ वे अब देश भर में मेरे और मेरे आदमियों के विरुद्ध
काम में लाए जा रहे हैं।" अन्त को एक पत्र में उसने साफ़ साफ़
लिखा कि—"मुझे मालूम हुआ है कि बहुत से अंगरेज़ एक दूसरा
सूबेदार खड़ा करना चाहते हैं। × × × हर शख़्स पर ज़ाहिर है
कि यूरोपवालों का एतबार नहीं किया जा सकता।"
मीर क़ासिम के साथ अंगरेज़ों के इस समय के व्यवहार की
आलोचना करते हुए मालेसन लिखता है :—
"जो अनुचित, नीच और शर्मनाक कार्रवाइयाँ मीर जाफ़र को मसनद
से हटाने के बाद तीन साल तक कलकत्ते की अंगरेज़ गवरमेण्ट ने कीं उनसे
अधिक अनुचित, अधिक नीच और अधिक शर्मनाक कार्रवाइयों की मिसालें
किसी भी क़ौम के इतिहास में नहीं मिलतीं।"*
मालेसन यह भी लिखता है कि—"मीर क़ासिम का एक मात्र
क़सूर यह था कि उसने यूरोप निवासियों की लूट से अपनी प्रजा
की रक्षा करने की कोशिश की।"† इस पर भी "मीर क़ासिम
*" The annals of no nation contain records of conduct more unworthy,
more mean, and more disgraceful, than that which characterised the English
Government of Calcutta during the three years which followed the removal
of Mir Jaffar."—The Decisive Battles of India, p. 133.
† " Whose only fault . . . was his endeavour to protect his
subjects from European extortion."—Ibid, p. 136.