भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 428, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें१७६ भारत में अंगरेज़ी राज
अन्त को इन बेशुमार शिकायतों के जवाब में इस सब मामले
का निपटारा करने के लिए ३० नवम्बर सन् १७६२ को गवरनर
वन्सीटार्ट और वारन हेस्टिंग्स नवाब से भेंट करने के लिए मुंगेर
पहुँचे। मीर क़ासिम ने जो शिकायतें इस मौक़े पर वन्सीटार्ट के
सामने पेश कीं उनमें से एक यह भी थी :—
"जब सूबेदार (मीर क़ासिम) बिहार की ओर गया हुआ था और
बंगाल में कोई शासक न रहा, उस समय अंगरेज़ों ने अपने अत्याचारों
द्वारा उस सूबे के हर ज़िले और हर गाँव को तबाह कर डाला था, प्रजा से
उनकी रोज़ की रोटी तक छीन ली गई थी और सरकारी महसूलों और माल-
गुज़ारी का जमा होना बिलकुल बन्द हो गया था। इससे सूबेदार को क़रीब
एक करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ x x x ।"*
१५ दिसम्बर सन् १७६२ को वन्सीटार्ट और मीर क़ासिम के
बीच एक सन्धि हुई जो 'मुंगेर की सन्धि' के
मुँगेर की नाम से मशहूर है। और बातों के साथ इस
सन्धि सन्धि में यह भी तय हुआ कि अंगरेज़ व्यापारी
आइन्दा से नमक, तम्बाकू, छालिया इत्यादि सब चीज़ों के ऊपर
vain did Mir Kassim represent, again and again, these evils on the Calcutta
Council."—The Decisive Battles of India, p. 137.
- "When His Excellency went to Behar, Bengal being left without a
ruler, every village and district in that province was ruined through the
oppression of the English, the subjects of the Sarkar were deprived of their
daily bread, and the collection of the revenues was entirely stopped, so that
His Excellency lost nearly a crore of rupees . . . ."—Calender of Persian
Correspondence, p. 194. No. 1695.