भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 427, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंविरुद्ध जितने इलज़ाम गवर्नर वन्सीटार्ट ने लगाए थे वे सब झूठे
हैं, उनका उद्देश्य केवल "लोगों के चित्तों को मीर जाफ़र की ओर से
फेर देना था," और यह कि मीर जाफ़र को मसनद से उतारने
और मीर क़ासिम को उसकी जगह बैठाने से सारी प्रजा अत्यन्त
असन्तुष्ट है। कमेटी के छै मेम्बरों के इस पत्र पर दस्तख़त हैं।
निस्सन्देह इस पत्र को पढ़ने के बाद कम्पनी के उस समय के अंग-
रेज़ मुलाज़िमों के किसी भी पत्र या बयान पर कुछ भी विश्वास
कर सकना क़तई नामुमकिन है।
तिजारत और सरकारी महसूल सम्बन्धी अंगरेज़ों के अत्याचार
इस समय तक समस्त बंगाल में फैल चुके थे और
अंगरेज़ों की लूट बढ़ते जा रहे थे। इन अत्याचारों के विषय में
खसोट कर्नल मॉलेसन लिखता है :—
"इस लज्जास्पद और अन्यायपूर्ण व्यवहार का नतीजा यह हुआ कि
प्रतिष्ठित देशी व्यापारी सब बरबाद हो गए, ज़िले के ज़िले निर्धन हो गए,
देश का सारा व्यापार उलट पुलट हो गया और व्यापार के ज़रिए नवाब को
जो आमदनी होती थी उसमें लगातार और तेज़ी के साथ कमी आती गई।
मीर क़ासिम ने बार बार कलकत्ते की कौन्सिल से इन ज़्यादतियों की
शिकायत की, किन्तु व्यर्थ।"*
- " The results of this shameful and oppressive system were that the
respectable class of native merchants were ruined, whole districts became
impoverished, the entire native trade became disorganised and the Nawab's
revenue from that source suffered a steady and increasing declension. In