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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 426

१७४ भारत में अंगरेज़ी राज
इसके बाद कोई सन्देह नहीं कि रामनारायण का काम तमाम कर दिया
जायगा । जिन जिन लोगों ने अंगरेज़ों का साथ दिया था, उनमें से सब नहीं
तो अधिकांश से मीरक़ासिम भारी भारी रक़में वसूल कर चुका है। रुपए
वसूल करने के लिए जो जो तकलीफ़ें उन्हें दी गई हैं, उनसे कई मर चुके ।
बहुतों को या तो कमीनेपन के साथ क़त्ल कर दिया गया और या
(जो हिन्दोस्तानियों में अक्सर होता है) बेइज़्ज़ती से बचने के लिए उन्होंने
स्वयं आत्महत्या कर ली × × × ।”
मीर क़ासिम के चरित्र को कलङ्कित करने में अब इन लोगों ने
कोई कसर उठा न रक्खी । अंगरेज़ों को रुपए
मीर क़ासिम पर देने के लिये ही मीर क़ासिम को अपने अनेक
झूठे इलज़ाम आश्रितों पर ज़ुल्म करने पड़े। इतिहास से
ज़ाहिर है कि ख़ुद अंगरेज़ ही इस तरह के अनेक अभागों को ला
लाकर मीर क़ासिम के हवाले करते थे। अंगरेज़ों ही ने साढ़े
सात लाख रुपए या कुछ अधिक के बदले में अपने सच्चे मित्र
निर्दोष रामनारायण को छल से पकड़ कर मीर क़ासिम के हाथों में
दिया और अब अंगरेज़ ही मीर क़ासिम को इन सब अन्यायों के
लिए ज़िम्मेदार ठहराते थे।
एक इलज़ाम मीर क़ासिम पर यह भी था कि वह अपनी फ़ौज
बढ़ा रहा था, उन्हें यूरोपियन ढङ्ग की क़वायद और यूरोपियन
शस्त्रों का इस्तेमाल सिखा रहा था और नई क़िलेबन्दियाँ करा
रहा था (!) ।
इसी पत्र में इन लोगों ने लिखा कि मीर जाफ़र के चरित्र के