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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 425

मीर क़ासिम १७३
जिस तरह मीर जाफ़र के ख़िलाफ़ अंगरेज़ों ने मीर क़ासिम को
अपनी साज़िशों का केन्द्र बनाया था, उसी तरह अब उलट कर मीर
क़ासिम के ख़िलाफ़ बूढ़े मीर जाफ़र को इन नई साज़िशों का केन्द्र
बनाया गया । मीर क़ासिम के विरुद्ध सामग्री तैयार करने के लिए
कलकत्ते की सिलेक्ट कमेटी के कुछ मेम्बरों ने ११ मार्च सन् १७६२
को कम्पनी के डाइरेक्टरों के नाम एक लम्बा पत्र भेजा, जिसमें
उन्होंने मीर क़ासिम और उसके चरित्र पर अनेक झूठे सच्चे दोष
लगाए, मीर जाफ़र की खूब तारीफें कीं, यह स्वीकार किया कि
मीर जाफ़र के चरित्र पर इससे पहले जो दोष लगाए जा चुके थे
वे सब झूठे थे और मीर जाफ़र को मसनद से उतारना एक भूल
और अन्याय था, और लिखा :—
"जब से वह (मीर क़ासिम) सूबेदार बना है, तब से उसके ज़ुल्मों
और लूट खसोट की बेशुमार मिसालें हम आपको दे सकते हैं । किन्तु उससे
यह पत्र बेहद लम्बा हो जायगा x x x। हम केवल एक रामनारायन का
हाल खास तौर पर देते हैं, जिसे मीर क़ासिम ने पटने की नायबी से अलग कर
दिया । यह बात मानी हुई है कि रामनारायन अपने वचन का सच्चा है, इसी
लिए उसकी नायबी का समर्थन करना हम सदा अपने लिए हितकर समझते
रहे । मीर क़ासिम आजकल रामनारायन को हथकड़ी डालकर रक्खे हुए है
और उस समय तक रक्खेगा जब तक कि वह उससे हद दर्जे धन न चूस ले ।
gain, deeming that the shortest road to their end lay in compassing
the ruin of Mir Kassim, in order to make a market of his successor."—The
Decisive Battles of India, p. 134.