भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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न था, इस पर भी उसने अंगरेज़ों के साथ अपने वचन का पूरी
तरह पालन किया। मुर्शिदाबाद की राजधानी में विदेशियों का
प्रभाव अधिक बढ़ गया था। इसलिए मीर क़ासिम ने मुंगेर को
अपनी नई राजधानी बनाया। उसने अधिकतर मुंगेर ही में रहना
शुरू कर दिया। मुंगेर की उसने बड़ी सुन्दर और मज़बूत क़िलेबंदी
की। क़रीब चालीस हज़ार फ़ौज वहाँ जमा की। उस फ़ौज को
यूरोपियन ढंग के अस्त्रों की शिक्षा देने के लिए अपने यहाँ कई
योग्य यूरोपियन नौकर रक्खे। एक बहुत बड़ा नया कारख़ाना
तोपें ढालने का उसने क़ायम किया। जिसकी तोपों के विषय में कहा
जाता है कि उस समय की यूरोप की बनी हुई तोपों से हर तरह
बढ़कर थीं। मीर क़ासिम की सारी प्रजा उससे अत्यन्त संतुष्ट थी
और उससे प्रेम करती थी।
किन्तु ज्योंही मीर क़ासिम और उसकी प्रजा के थोड़ा बहुत
[पार्श्व-शीर्षक: मीर क़ासिम के] पनपने का समय आया, त्योंही मीर क़ासिम को
[ख़िलाफ़ अंगरेज़ों] भी मसनद से उतारने की तैयारियाँ शुरू हो
[की साज़िश] गईं। कर्नल मॉलेसन साफ़ लिखता है कि मीर
क़ासिम ने अंगरेज़ों के साथ अपने सब वादे पूरे
कर दिए, “किन्तु लालची अंगरेज़ों को अपनी धन पिपासा के
शान्त करने का सब से अच्छा उपाय यही दिखाई दिया कि मीर
क़ासिम को नाश करके उसके उत्तराधिकारी के साथ नए सिरे से
सौदा किया जावे।”*
- “Mir Kassim performed his covenant. But . . . . . men greedy of