भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 422, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें१७० भारत में अंगरेज़ी राज
में और उसमें बड़ा अन्तर था। मीर जाफ़र अयोग्य, निर्बल,
स्वार्थी, अदूरदर्शी और भीरु था। इसके विपरीत
[मीर क़ासिम का] मीर क़ासिम की योग्यता, उसके बल, अपनी
[चरित्र और शासन] प्रजा के लिए उसकी हित चिन्ता, उसकी दूर-
दर्शिता, उसकी वीरता और शासक की हैसियत से उसकी कार्य
कुशलता की क़रीब क़रीब सब इतिहास लेखकों ने मुक्तकण्ठ से प्रशंसा
की है। इतिहास लेखक कर्नल मालेसन जगह जगह लिखता है कि
मीर क़ासिम "अत्यन्त योग्य और व्यवहार कुशल मनुष्य था......
अपने इरादों में लोहे की तरह दृढ़ रहता था, हर बात को ठीक ठीक
समझ कर उसका जल्दी से फ़ैसला कर सकता था, उसके विचार उदार
थे......उसका दिमाग़ साफ़ था और उसका चरित्र मज़बूत था।*"
एक दूसरा अंगरेज़ इतिहास लेखक लिखता है—"मीर क़ासिम
के अन्दर एक सिपाही की वीरता और एक राजनीतिज्ञ की दूर-
दर्शिता दोनों मौजूद थीं।”† कर्नल मालेसन लिखता है कि मीर
क़ासिम को मीर जाफ़र के साथ देशघातकों की पंक्ति में रखना
मीर क़ासिम के साथ अन्याय करना है। वह यह भी लिखता है कि
मीर क़ासिम का इरादा मीर जाफ़र के साथ विश्वासघात करने का
न था। मीर क़ासिम ने अपने बूढ़े श्वसुर मीर जाफ़र की निर्बलता,
* "... a man of great tact and ability . . . of iron will,
quick decision, large views . . . of clear head and strong character."--
The Decisive Battles of India, by Colonel Malleson, pp. 127, 145.
† "He united the gallantry of the soldier with the sagacity of the
statesman."--Transactions in India from 1757 to 1784.