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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 42

१६ पुस्तक प्रवेश
उस ज़माने का उसका सारा वृत्तान्त अंगरेज़ों के एक धनक्रीत लेखक का
लिखा वृत्तान्त है ।
और भी अनेक भारतीय और अन्य लेखकों को फ़ारसी और दूसरी
भाषाओं में झूठे ऐतिहासिक वृत्तान्त लिखने के लिए ईस्ट इण्डिया कम्पनी
की ओर से समय समय पर धन मिलता रहा है । मिसाल के तौर पर
लॉर्ड विलियम बेण्टिङ्क ने ऐबे दुबॉय का प्रसिद्ध फ़्रान्सीसी ग्रन्थ, जिसमें
हिन्दुओं के उस समय के रहन सहन इत्यादि का ज़िक्र है, आठ हज़ार
रुपये देकर दुबॉय से ख़रीदा, कम्पनी की ओर से उसे अंगरेज़ी में प्रकाशित
कराया और अन्त में कम्पनी ने उसके लिए दुबॉय को आजीवन पेनशन
दी । हैदरअली की एक फ़ारसी जीवनी लिखने के लिए मिरज़ा इक़बाल को
कम्पनी की ओर से रुपए दिए गए । हैदरअली की यह जीवनी शुरू से
आख़ीर तक झूठे कलङ्कों और पक्षपात से भरी हुई है । करनल माइल्स ने
हैदरअली की एक जीवनी अंगरेज़ी में लिखी है, जिसके विषय में करनल
माइल्स का बयान है कि वह पुस्तक मीर हुसेनअली ख़ाँ किरमानी की
फ़ारसी पुस्तक 'निशाने हैदरी' का अनुवाद है और 'निशाने हैदरी' का मूल
फ़ारसी मसविदा मलका विक्टोरिया के निजी पुस्तकालय में मौजूद था ।
हमने करनल माइल्स की पुस्तक को पढ़ा । हम यह देख कर चकित रह गए
कि उस पुस्तक के अन्दर पृष्ठ के पृष्ठ ऐसे हैं, जिनका एक एक शब्द एक
फ़्रान्सीसी लेखक एम० एम० डी० एल० टी० के ग्रन्थ 'हिस्ट्री ऑफ़ हैदरशाह'
के एक अंगरेज़ी संस्करण के कुछ पृष्ठों से मिलता है । यह फ़्रान्सीसी किताब
हैदरअली के जीवनकाल में लिखी गई थी । मीर हुसेनअली ख़ाँ किरमानी
की किताब ज़ाहिर है उसके बाद की लिखी हुई है । यदि फ़ारसी लेखक ने