भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 395, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंगए। इन तीनों ज़िलों के लिए मुर्शिदाबाद के दरबार से कम्पनी
के नाम अलग अलग सनदें जारी कर दी गईं। बर्धमान के लिए
जो सनद् जारी की गई उसमें लिखा है कि वहाँ के ज़मींदार और
काश्तकार दोनों पहले की तरह क़ायम रहेंगे, केवल सरकारी माल-
गुज़ारी का जो रुपया अभी तक सूबेदार के कर्मचारी वसूल करके
मुर्शिदाबाद भेजा करते थे, वह आइन्दा कम्पनी के नौकर वसूल
करके कम्पनी के पास कलकत्ते भेजा करेंगे और इस धन के ख़र्च
से कम्पनी साम्राज्य की रक्षा के लिए या जब ज़रूरत हो, सम्राट
या सूबेदार की मदद के लिए, पाँच सौ यूरोपियन सवार, दो हज़ार
यूरोपियन पैदल और आठ हज़ार हिन्दोस्तानी सिपाहियों की एक
सेना रक्खेगी। इसी तरह की सनदें मेदिनीपुर और चट्टग्राम के
लिए भी जारी की गईं।
इसके अलावा वन्सीटार्ट और केलो ने कलकत्ता कमेटी को
लिखा कि इस बग़ावत से :-
"निस्सन्देह कम्पनी को बड़ा लाभ हुआ है। × × × पटने की फ़ौज
को देने के लिए करनल के हाथ रुपए की रक़म भेजी जावेगी और हमें यह
भी आशा है कि इसके अलावा कलकत्ते भेजने के लिए हमें तीन या चार
लाख रुपए और मिल जावेंगे, जिनसे कम्पनी की वहाँ की और मद्रास की
इस समय की ज़रूरतें पूरी हो सकेंगी।"*
- "The advantages to the Company are great indeed. . . . . A
supply of money will be sent with the Colonel for the payment of the troops
at Patna, and we have even some hopes of obtaining three or four lacks