भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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सूची दी गई है और कहा गया है कि मीर जाफ़र ने उन्हें मरवा डाला,
सिवाय दो के उनमें से सब इस समय ज़िन्दा हैं x x x ।"*
न जाने इसी तरह के और कितने झूठ सिराजुद्दौला और मीर
जाफ़र दोनों के ख़िलाफ़ इस समय तक प्रचलित हैं और इतिहास
की पुस्तकों में दर्ज हैं।
मीर जाफ़र को मसनद से उतार कर कलकत्ते में नज़रबन्द
रक्खा गया। दो हज़ार रुपए माहवार उसके ख़र्च के लिए नियत
किए गए। कहते हैं कि इस पर बूढ़े मीर जाफ़र ने करबला जाने
की इजाज़त चाही और उसके लिए ख़र्च की दरखास्त की, किन्तु
उसे करबला जाने की भी इजाज़त न मिल सकी।
अब केवल यह देखना बाक़ी है कि मीर जाफ़र के साथ इस
विश्वासघात द्वारा अंगरेज़ों और अंगरेज़ कम्पनी
कम्पनी और अंगरेज़ों को क्या क्या लाभ पहुँचा।
को लाभ सब से पहले तीन ज़िले बर्धमान, मेदिनीपुर
और चट्टग्राम जिनकी सालाना आमदनी तमाम बंगाल की आम-
दनी का एक तिहाई थी, सदा के लिए कम्पनी के हवाले कर दिए
- "... . In Justice to the memory of the late Nawab Mir Jaffir, we
think it incumbent on us to acquaint you, that the horrible massacres where-
with he is charged by Mr. Holwell, in his 'Address to the proprietors of
East India Stock' (p. 46), are cruel aspersions on the character of that prince,
which have not the least foundation in truth. The several persons there
affirmed and who have been generally thought to have been murdered by his
order, are all now living, except two, . . . . "--Letter addressed to the
Hon'ble Court of Directors by Clive and others, 1st October, 1765.