भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 393, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमीर जाफ़र १४१
का लिखा हुआ वह पत्र पढ़ा गया, जिसका ज़िक्र ऊपर एक जगह
आ चुका है। उस पत्र में लिखा था :—
"नवाब जाफ़रअली ख़ाँ निहायत ज़ालिम और लालची तबीयत का
आदमी था, साथ ही बड़ा काहिल भी था, और उसके आस पास के आदमी
या तो कमीने, गुलाम और खुशामदी थे या उसकी बुरी इच्छाओं को पूरा
करने के ज़रिये थे। हर श्रेणी के इस तरह के लोगों की बेहद मिसालें मौजूद
हैं जिनका बिना किसी वजह के उसने ख़ून कर डाला।"*
इसके बाद इसी पत्र में पिता या पति के नाम इत्यादि समेत
बड़ी तफ़सील के साथ अनेक ऐसे पुरुषों और स्त्रियों की सूची दी
हुई है, जिनकी बाबत कहा गया है कि मीर जाफ़र ने उन्हें मार
डाला। किन्तु १ अक्तूबर सन् १७६५ को मीर जाफ़र की मृत्यु के
बाद क्लाइव और उसके साथियों ने डाइरेक्टरों के नाम एक दूसरा
पत्र भेजा जिसमें लिखा है:—
"× × × हम आपको सूचित कर देना अपना फ़र्ज़ समझते हैं कि
मि० हॉलवेल ने × × × जिन भयंकर हत्याओं का इलज़ाम मीर जाफ़र पर
लगाया है वे उस नवाब के चरित्र पर झूठे कलंक और उसके साथ ज़ुल्म हैं।
उनमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है, जिन स्त्री पुरुषों की (हॉलवेल के उस पत्र में)
- "The Nawab Jaffir Ali Khan, was of a temper extremely tyrannical
and avaricious, at the same time very indolent, and the people about him
being either abject slaves and flatterers, or else the base instruments of his
vices; . . numberless are the instances of men, of all degrees, whose
blood he has spilt without the least assigned reason."—Holwell's Address to
the proprietors of the East India Stock, p. 46.