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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 388

१३६ भारत में अंग्रेज़ी राज
से कुछ घंटे पहले कम्पनी की सेना ने अचानक मीर जाफ़र को
महल में सोते हुए जा घेरा। मीर जाफ़र की उस समय की
मानसिक स्थिति को मालेसन ने बड़े सुन्दर शब्दों में चित्रित करने
का यत्न किया है। वह लिखता है :—
“निस्सन्देह उस दिन प्रभात की महत्वपूर्ण घड़ी में बूढ़े नवाब को तीन
मीरजाफ़र का साल से कुछ अधिक पहले के उस दिन की अवश्य
दुःख और पश्चात्ताप याद आई होगी, जब कि प्लासी के मैदान में, इन्हीं
अंग्रेज़ों के साथ गुप्त समझौता करके उस मसनद के
लिए, जिसे अब उसका एक दूसरा सम्बन्धी उसी तरह के उपायों द्वारा उसके
हाथों से छीन रहा था, उसने अपने स्वामी और आत्मीय सिराजुद्दौला के साथ
विश्वासघात किया था। मीर जाफ़र अवश्य इस समय सोचता होगा कि—
‘जिस सत्ता को मैंने इतने नीच और कलंकित उपाय से प्राप्त किया था उससे
मुझे क्या लाभ पहुँचा ? मैंने सिराजुद्दौला से उसका महल छीना ! उस महल
में तीन साल तक नवाबी की ! किन्तु इन तीन साल के अंदर जो यातनाएं
मुझे सहनी पड़ीं उनके सामने मेरे जीवन के पहले ५८ साल के तमाम कष्ट
फीके हैं ! वे लोग, जिनके हाथ मैंने अपना मुल्क बेचा था, आज मुझे डर
दिखला रहे हैं ! यदि प्लासी में मैं अपने उस बालक सम्बन्धी के साथ
वफ़ादार रहा होता, जिसने अत्यन्त हसरत भरे शब्दों में मुझसे अपनी
पगड़ी की लाज रखने की प्रार्थना की थी तो इस समय मेरी स्थिति क्या
होती ? निस्सन्देह जो गुस्ताख़ विदेशी प्लासी से अब तक मुझ पर हुकुम
चलाते रहे और जो अब मुझे मसनद से उतारने की धमकी दे रहे हैं, यदि
प्लासी के मैदान में मैंने उनके नाश के मुख्य साधन बनने का यश प्राप्त कर