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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 387

में से किसी में सम्राट के पैर न जमने दिए जावें, श्रीहट्ट ज़िले में
चूना ख़रीदने के लिए अंगरेज़ों को विशेष सुविधाएँ दी जावें । मीर
क़ासिम अधिकार मिलते ही इस उपकार के बदले में वन्सीटार्ट को
पाँच लाख रुपए, हॉलवेल को दो लाख सत्तर हज़ार और इसी
तरह कौन्सिल के अन्य सदस्यों में से किसी को ढाई लाख, किसी
को दो लाख इत्यादि कुल मिलाकर बीस लाख रुपए दे और इनके
अलावा पाँच लाख रुपए कम्पनी को बतौर क़र्ज़ दे । गवर्नर
वन्सीटार्ट उसकी कौन्सिल के अन्य सदस्यों और मीर क़ासिम,
सब के इस सन्धिपत्र पर दस्तख़त हो गए। यह वही मीर क़ासिम
था जिसे मीर जाफ़र ने अपना विश्वस्त प्रतिनिधि बनाकर अंगरेज़ों
के पास बातचीत के लिए भेजा था ।
३० सितम्बर को सौदा पक्का करके मीर क़ासिम कलकत्ते से
[मीर जाफ़र के] मुर्शिदाबाद के लिए रवाना हुआ । २ अक्तूबर
[महल पर रात को] को मीर जाफ़र पर दबाव डालने के लिए गवर्नर
[अचानक हमला] वन्सीटार्ट और उसके कुछ साथी कलकत्ते से
चले। मुर्शिदाबाद भागीरथी के एक ओर और
क़ासिम बाज़ार की कोठी दूसरी ओर थी । १५, १६ और १८ अक्तूबर
को वन्सीटार्ट और मीर जाफ़र में बातचीत हुई। मीर जाफ़र अंगरेज़ों
की नई तजवीज़ें और मीर क़ासिम के इरादों का हाल सुनकर घबरा
गया । उसने मीर क़ासिम के हाथों में शासन के अधिकार सौंपने
से इनकार कर दिया। मीर क़ासिम और अंगरेज़ों के लिए अब
पीछे हट सकना असम्भव था । २० अक्तूबर को सबेरे सूर्य निकलने