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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मीर जाफ़र १३३
इस पर कड़ी से कड़ी माँगें पूरी करने के लिए उसे मजबूर किया जाता
था x x x ।"*
मौलवी बदरुद्दीन अहमद ने लिखा है कि जो माँगें इस समय
अंगरेज़ों ने मीर जाफ़र के सामने पेश कीं उनमें एक यह भी थी
कि श्रीहट्ट (सिलहट) और इस्लामाबाद के इलाक़ों के 'फ़ौज-
दारी' के अधिकार कम्पनी को दे दिए जावें। मीर जाफ़र
इस हद तक जाने के लिए तैयार न था। उसने अपने विश्वस्त और
होशियार दामाद नौजवान मीर क़ासिम को अंगरेज़ों से बातचीत
करने के लिए कलकत्ते भेजा।
१५ सितम्बर सन् १७६० की गुप्त सभा में अंगरेज़ों ने तय
किया कि मीर क़ासिम और राजा दुर्लभराम इन
मीर क़ासिम के दोनों को भी इस नई साज़िश में शामिल कर
साथ गुप्त सन्धि लिया जावे और राजा दुर्लभराम की मार्फ़त
सम्राट शाह आलम को अपनी ओर करने की कोशिश की जावे।
यह भी तय हुआ कि कुछ मामूली लोगों को ख़ास ख़ास नौकरियों
system, is the want of money; a want that is not confined to ourselves alone,
but on which greatly depend,
"The operations on the cost,
"The reduction of Pondicherry, and
"The provision of an investment for loading home the next year's ships
at all the three presidencies."- Proceedings at Fort William, 11th September,
1760, First Report, 1712, pp. 228, 229.

  • "The situation of Jaffir was deplorable from the first. With an
    exhausted treasury and exhausted country, and vast engagements to dis-
    charge, he was urged to the severest exactions; . . . ."-Mill, vol. iii,
    pp. 213, 214.