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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 38

१२ पुस्तक प्रवेश
कप्तान ईस्टविक, जिसे ठीक उन्हीं दिनों कई साल सिन्ध में रहने और
सिन्ध के देशी शासकों और वहाँ की प्रजा दोनों से मिलने जुलने का अव-
सर मिला और जो सिन्ध की भाषाओं और वहाँ के रस्मोरिवाज से अच्छी
तरह परिचित था, इस लज्जाजनक झूठ की आलोचना करते हुए एक दूसरे
यूरोपियन विद्वान ग्रैटन का नीचे लिखा वाक्य नक़ल करता है—
“इतिहास में अनेक बातें ऐसी लिखी मिलती हैं, जिनको
सच साबित करने या जिनका खण्डन करने का कोई ख़ास मूल्य
नहीं है । सदाचार की इस तरह की ऊँची (किन्तु असत्य) मिसालें
इतिहास में मिलती हैं, जिन्हें यदि एक बार लोगों ने सच्चा मान
लिया है तो उनसे दुनियां का भला ही हुआ है । किन्तु जब
किसी व्यक्ति या जाति के चरित्र पर कलङ्क लगाए जाते हैं और
जब हम यह देखते हैं कि कितनी आसानी से उन झूठे कलङ्कों का
प्रचार किया जाता है, कितने शौक़ के साथ लोग उन्हें पढ़ते और
सुनते हैं, और जिन बातों को गढ़ लेने या फैलाने में कुछ भी
ख़र्च नहीं होता, किन्तु जिनका पूरी तरह खण्डन करने में ज़िन्दगी
भर मेहनत और इस तरह की परिस्थिति की ज़रूरत होती है,
जिसका मिलना क़रीब क़रीब नामुमकिन हो जाता है, उन बातों
पर लोग सहज ही में और बेपरवाही के साथ विश्वास कर लेते हैं,


after birth; but more frequently placed them under cushions and sat down,
smoking and drinking and jesting with each other about their hellish work,
while their children were being suffocated beneath them."—The Conquest of
Sindh, part ii, p. 348.