भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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केलो (Caillaud) बंगाल में कम्पनी की सेनाओं का प्रधान सेना-
पति नियुक्त हुआ ।
सन् १७५६ के अन्त में शहज़ादे अलीगौहर ने दूसरी बार
[पार्श्व टिप्पणी: सम्राट शाह आलम] बिहार पर चढ़ाई की । इस बीच बंगाल की
[पार्श्व टिप्पणी: की बंग यात्रा] अफ़सोसनाक हालत की और अनेक शिकायतें
मुग़ल दरबार तक पहुँच चुकी थीं । इसके सिवा
नाम को तो बंगाल अभी तक सम्राट के अधीन था, किन्तु आए
दिन की बग़ावतों के सबब बंगाल से दिल्ली खिराज जाना कई
साल से बन्द था । इन शिकायतों को दूर करना और शाही खिराज
वसूल करना शाहज़ादे की इस चढ़ाई का उद्देश था ।
शहज़ादे की सेना ने अभी बिहार प्रान्त में क़दम रक्खा ही था
कि शहज़ादे को सम्राट आलमगीर दूसरे की मृत्यु का समाचार
मिला । शाहज़ादा अलीगौहर अब दिल्ली से बाहर होते हुए भी,
शाहआलम दूसरे के नाम से सम्राट ऐलान हुआ और भारत-
सम्राट ही की हैसियत से उसने अब बिहार में प्रवेश किया । शाह
आलम अब मुग़ल साम्राज्य का अनन्य अधिपति था । उसकी
फ़रमांबरदारी हर सूबेदार, तमाम प्रजा और यूरोपियन व्यापारियों
सब पर वाजिब थी । किन्तु अंगरेज़ों की नीति उसकी तरफ़ कुछ
अजीब रही । एक तरफ़ उन्होंने मीर जाफ़र और मीरन दोनों
पर इस बात के लिए ज़ोर दिया कि आप लोग अपनी सेना सहित
पटने पहुँचकर सम्राट का मुक़ाबला कीजिए और सम्राट की सेना
के बिहार में प्रवेश करते ही करनल केलो फ़ौरन अपनी सेना सहित