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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 373

मीर जाफ़र १२३
कलकत्ते से मुर्शिदाबाद की ओर बढ़ा और वहाँ से मीरन के अधीन
नवाब की कुछ सेना साथ लेकर १८ जनवरी सन् १७६० को सम्राट
की सेना के मुक़ाबले के लिए पटने की ओर रवाना हुआ। दूसरी
ओर अंगरेज़ों ने मीर जाफ़र और मीरन दोनों से ऊपर ऊपर शाह
आलम से गुप्त बातचीत शुरू कर दी।
अंगरेज़ों का शाह आलम से लड़ने के लिए तैयार हो जाना
[सम्राट के खिलाफ़] इतिहास लेखक मिल के शब्दों में "खुली बग़ावत
[खुली बग़ावत] थी।"* गवर्नर हॉलवेल यह भी लिखता है—
"शाह आलम ने अंगरेज़ों की सब शर्तें मंज़ूर
कर लेने की रज़ामन्दी प्रकट की।"† मालूम नहीं वे क्या शर्तें थीं
और बाद को उनका क्या हुआ।
करनल केलो ने अपने पत्रों में इस बात की शिकायत की है कि
मीरन ने सम्राट के विरुद्ध केलो का उस तरह साथ नहीं दिया जिस
तरह केलो चाहता था। निस्सन्देह मीर जाफ़र और मीरन दोनों सम्राट
से लड़ने के खिलाफ़ थे किन्तु केलों उन्हें लड़ाना चाहता था। इस
पर अंगरेज़ों और उन दोनों में ख़ासा मतभेद हो गया। अंगरेज़ों
और मीरन में पहले से भी भीतर ही भीतर वैमनस्य बढ़ रहा था।
मुर्शिदाबाद की सेना के पहुँचने से पहले ही "अंगरेज़ों का पक्का
हितसाधक" रामनारायन अपनी सेना लेकर शाह आलम के मुक़ा-
बले के लिए पटने से बाहर निकला। इस मामले में वह पूरी तरह

  • "To oppose him was undisguised rebellion." Mill, vol. iii. p. 202.
    † Ibid.