भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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जा चुकी है। उस क्रांति के बाद एक सन्धि की गई है जिससे कम्पनी को बड़े
ज़बरदस्त फ़ायदे हुए हैं। मुझे मालूम है कि इन सब बातों की तरफ़ एक
दर्जे तक (अंगरेज़) क़ौम का ध्यान आकर्षित हो चुका है। किन्तु मौक़ा मिलने
पर अभी बहुत कुछ और किया जा सकता है, बशर्ते कि कम्पनी इस तरह के
प्रयत्नों में लगी रहे जो उसके आज कल के इतने बड़े इलाक़े और आगे की
ज़बरदस्त सम्भावनाओं दोनों के अनुरूप हों। मैंने कम्पनी को अत्यन्त ज़ोरदार
शब्दों में इस बात की ज़रूरत दर्शा दी है कि उन्हें इतनी सेना हिन्दोस्तान
भेज देनी चाहिये और बराबर हिन्दोस्तान में रखनी चाहिये, जिससे वे अपने
धन और इलाक़े को बढ़ाने के सब से पहले मौक़े से फ़ायदा उठा सकें।
दो साल की मेहनत और तजरुबे से मैंने इस देश की हुकूमत के विषय
में और यहाँ के लोगों के स्वभाव के विषय में जो परिपक्व ज्ञान प्राप्त किया
है उससे मैं साहस के साथ कह सकता हूँ कि इस तरह का मौक़ा जल्दी ही
फिर आने वाला है। मौजूदा सूबेदार × × × बूढ़ा है और उसका नौजवान
बेटा इतना ज़ालिम और निकम्मा है और अंगरेज़ों का इतना खुला दुशमन
है कि इस नवाब के बाद उसे मसनद पर बैठने देना क़रीब क़रीब ख़तरनाक
होगा। केवल दो हज़ार यूरोपियनों की छोटी सी सेना हमें इन दोनों की ओर
से बेखटके कर देगी और यदि इनमें से कोई हमारे साथ झगड़ा करने की
हिम्मत करेगा तो इस सेना द्वारा हुकूमत की बाग़ हम अपने हाथों में ले सकेंगे।
"हिन्दोस्तान के लोगों को अपने राजाओं के साथ किसी तरह का प्रेम
नहीं है, इसलिए इस तरह का काम कर डालने में हमें और भी कम कठि-
नाई होगी × × ×
"किन्तु मुमकिन है, इतना बड़ा राज एक तिजारती कम्पनी के लिए बहुत