भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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उसके असर को देख कर डर गए। तुरन्त स्वयं वाट्स ने बीच में
पड़कर मीर जाफ़र और दुर्लभराम दोनों में सुलह करवा दी।
इस तमाम छेड़ छाड़ से क्लाइव का मुख्य उद्देश बंगाल के
तमाम पुराने और बड़े बड़े घरानों के बल को तोड़ना, मीर जाफ़र
को समस्त प्रजा में अप्रिय बना देना और सूबेदारी भर में अंगरेज़ों
के बल और उनके प्रभाव की धाक जमा देना था।
राजा रामनारायन पर एक विशाल सेना लेकर दोबारा चढ़ाई
करने की तजवीज़ की गई। अफ़वाह उड़ी या
राजा रामनारायन उड़ाई गई कि अलवर्दी ख़ाँ की बूढ़ी बेवा ने अवध
पर चढ़ाई के नवाब वज़ीर को पत्र लिखा है कि आप आकर
मीर जाफ़र के विरुद्ध रामनारायन को मदद दीजे। क्लाइव और
मीर जाफ़र के लिए केवल चन्द महीने पहले की सन्धि और दोनों
ओर की क़समों को मिट्टी में मिलाकर अब फिर बिहार प्रान्त पर
चढ़ाई करना और रामनारायन को ज़ेर करना ज़रूरी हो गया।
क्लाइव ने इस बहाने से ५०,००० सेना जमा कर ली। मीर जाफ़र
को डर दिखलाकर उससे धन खींचने का भी क्लाइव को यह अपूर्व
अवसर दिखाई दिया। किन्तु मीर जाफ़र की माली हालत इस
समय बहुत ख़राब थी। अव्वल तो मुर्शिदाबाद के ख़ज़ाने की जो
दशा उसने प्लासी से पहले समझ रक्खी थी वह प्लासी के बाद न
निकली। इस ख़ज़ाने की आशा पर ही उसने अंगरेज़ कम्पनी को
अलग और क्लाइव और उसके अनेक साथियों को व्यक्तिगत
हैसियत से अलग बड़ी बड़ी रक़में देने के वादे कर रक्खे थे।