भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 359, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंपटने की तरफ़ रवाना हुआ। पहले बहाना यह लिया गया कि
यह सेना फ्रांसीसियों का पीछे करने के लिए भेजी जा रही है।
किन्तु १२ अगस्त को मेजर कूट के पास क्लाइव का एक पत्र
पहुँचा जिसमें क्लाइव ने उसे यह हिदायत की कि तुम पटने पहुँच
कर मीर जाफ़र के एक भाई महमूद अमीन ख़ाँ के साथ मिलकर
रामनारायन को गद्दी से हटाने का प्रयत्न करो।
कूट पटने पहुँचा, किन्तु उस थोड़ी सी सेना से रामनारायन
को परास्त कर सकना नामुमकिन था। राजा रामनारायन को भी
मेजर कूट के नाम क्लाइब के पत्र की कुछ ख़बर मिल गई थी।
उसने धीरज से काम लिया। समझौते की बातचीत शुरू हुई। २२
अगस्त को रामनारायन के महल में सभा हुई। जितने इलज़ाम
रामनारायन पर लगाए गए थे, उन सब को उसने शान्ति के साथ
झूठा साबित किया। कूट और महमूद अमीन के साथ मीर जाफ़र
का दामाद मीर क़ासिम भी मौजूद था। अन्त में एक ब्राह्मण को
बुलाकर सब की मौजूदगी में राजा रामनारायन ने मीर जाफ़र को
सूबेदार स्वीकार किया और उसकी वफ़ादारी की क़सम खाई।
मीर क़ासिम और महमूद अमीन ने कुरान उठाकर अपने दिलों की
सफ़ाई का एलान किया और फिर वे तीनों तथा मेजर कूट सब
एक दूसरे से गले मिले। मेजर कूट अपनी सेना सहित ७ सितम्बर
को पटने से चल कर सात दिन में मुर्शिदाबाद वापस पहुँच गया।
किन्तु क्लाइव की इच्छा अभी पूरी न हुई थी। राजा रामनारायन
एक ख़ासा ज़बरदस्त नरेश था। क्लाइव का असली उद्देश उसके