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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 358

१०८ भारत में अंग्रेज़ी राज
जाफ़र इस मामले में क्लाइव और उसके साथियों के इशारे पर चल
रहा था और उन्हीं की संगीनों के बल सब खेल खेल रहा था।
सब से पहले इन लोगों ने मुर्शिदाबाद की सूबेदारी के अधीन
बड़े बड़े प्रान्तों से हिन्दू नरेशों को हटाकर उनकी जगह मुसलमानों
को नियुक्त करने के प्रयत्न शुरू किए।
पहला हिन्दू नरेश, जिसे क्लाइव और मीर जाफ़र ने मिलकर
मिटाना चाहा, बिहार प्रान्त का शासक राजा
राजा रामनारायन रामनारायन था। रामनारायन अलीवर्दी ख़ाँ के
पर हमला ख़ास आदमियों में से था और अलीवर्दी ख़ाँ ने
ही उसे बढ़ाकर इस उच्च पद तक पहुँचाया था। अलीवर्दी ख़ाँ
और सिराजुद्दौला दोनों का रामनारायन सदा वफ़ादार रहा।
सिराजुद्दौला के विरुद्ध जो साज़िश की गई उसमें वह शामिल न था,
किन्तु जब उसने सिराजुद्दौला के मारे जाने और मीर जाफ़र के
मसनद पर बैठने की ख़बर सुन ली तो अपने प्रान्त में भी मीर जाफ़र
की सूबेदारी का बाज़ाब्ता एलान करा दिया।
राजा रामनारायन पर अब यह इलज़ाम लगाया गया कि तुमने
फ़्रान्सीसियों को अपने यहाँ पनाह दे रक्खी है और अवध के नवाब
वज़ीर के साथ मिलकर तुम मीर जाफ़र के ख़िलाफ़ साज़िश कर
रहे हो। निस्सन्देह यह सब क़िस्सा केवल उसे बिहार की गद्दी से
हटाने के लिए गढ़ा गया था।
६ जुलाई सन् १७५७ को क्लाइव के हुकुम से मेजर कूट २३०
गोरे और क़रीब ३०० हिन्दोस्तानी सिपाही लेकर मुर्शिदाबाद से