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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 357

मीर जाफ़र १०७
था और मालूम होता है कि सिराजुद्दौला की मृत्यु के बाद
सूबेदारी की बाज़ाब्ता सनद मीर जाफ़र को दिल्ली दरबार से
अता हो गई।
सिराजुद्दौला का नाना अलीवर्दी ख़ाँ इस बात को समझता था
कि प्रजा के सुख और उनकी खुशहाली को बढ़ाना और बिना मज़हब
इत्यादि का ख़याल किए योग्य आदमियों को राज के उच्च से
उच्च और ज़िम्मेदार ओह्दों पर नियुक करना राजा का धर्म है;
और इस धर्म के पालन करने से ही राज की जड़ें चिरस्थाई हो
सकती हैं। इसलिए अपनी सूबेदारी में क़रीब क़रीब सब ऊँचे ओह्दों
पर उसने हिन्दुओं को नियुक्त कर रक्खा था। सिराजुद्दौला भी
अपने थोड़े से शासनकाल में और ऐसे कठिन समय में, जब कि
उसे रात दिन षड्यंत्रों और साज़िशों का मुक़ाबला करना पड़ता
था, अपने नाना की इस उदार नीति का ठीक ठीक पालन करता
रहा। अलीवर्दी ख़ाँ और सिराजुद्दौला दोनों अपनी हिन्दू और
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