भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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तीसरा अध्याय
मीर जाफ़र
विश्वासघात करने वालों में किसी तरह की भी उच्च मानसिक
[हाशिया: हिन्दू-मुसलिम] या नैतिक ख़ूबियों का मिलना क़रीब क़रीब
[हाशिया: पक्षपात का] नामुमकिन है। इसलिए कोई अचरज नहीं कि
[हाशिया: प्रारम्भ] शासक की हैसियत से मीर जाफ़र अयोग्य,
कमज़ोर और अदूरदर्शी साबित हुआ। इसके
अलावा वह इस समय क्लाइव और उसके अंगरेज़ साथियों के हाथों
की कठपुतली था। क्लाइव की इच्छा के ख़िलाफ़ वह कोई काम न कर
सकता था। मुर्शिदाबाद के एक हाज़िर तबियत दरबारी ने मीर
जाफ़र का नाम “कर्नल क्लाइव का गधा” रख रक्खा था और मीर
जाफ़र की मृत्यु के समय तक यह उपाधि उसके साथ लगी रही।
दिल्ली सम्राट का दरबार इस समय तक काफ़ी निर्बल हो चुका