भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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अमींचन्द के दिल पर इस का ज़बरदस्त सदमा हुआ।
बाद में स्वास्थ्य ठीक करने के लिए क्लाइव ने उसे तीर्थयात्रा की
सलाह दी। वह तीर्थयात्रा के लिए गया, किन्तु इसी सदमे से डेढ़
साल के अन्दर अमींचन्द की मृत्यु हो गई।
उन दिनों इंग्लिस्तान में जालसाज़ी की सज़ा मौत थी। किन्तु
क्लाइव ने पालिमेण्ट की कमेटी के सामने बड़े गर्व के साथ अपनी
इस जालसाज़ी का ज़िक्र किया और उसके बदले में क्लाइव को
“लॉर्ड” की उपाधि दी गई, इंग्लिस्तान में क्लाइव का बुत खड़ा
किया गया और उसके सम्मान तथा प्लासी की लड़ाई की यादगार
में तमगे ढाले गए।
चन्द रोज़ के अन्दर सिराजुद्दौला राजमहल नामक स्थान पर
[हाशिया: सिराजुद्दौला की] गिरफ़्तार कर लिया गया। अपने उस वीर तथा
[हाशिया: हत्या] शाही शत्रु के साथ कम्पनी का व्यवहार अत्यन्त
लज्जाजनक रहा। २ जुलाई को वह मुर्शिदाबाद
लाया गया। कहा जाता है कि मीर जाफ़र उसे आदर के साथ
मुर्शिदाबाद में नज़रबन्द रखना चाहता था। किन्तु उसी रात को
एक मनुष्य मोहम्मद बेग ने सिराजुद्दौला को क़त्ल कर डाला।
अगले दिन सिराजुद्दौला का कटा हुआ शरीर हाथी पर रखकर
मुर्शिदाबाद की गलियों में घुमाया गया।
फ़ारसी पुस्तक “रियाज़ुस्सलातीन” का मुसलमान रचयिता
लिखता है :—