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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 353

सिराजुद्दौला १०३
“अंगरेज़ सरदारों और जगत सेठ की साज़िश से सिराजुद्दौला को क़त्ल
किया गया।”
सिराजुद्दौला की हत्या के दो दिन बाद क्लाइव ने सिलेक्ट कमेटी
के नाम एक पत्र में बड़े गर्व के साथ अपने अंगरेज़ मालिकों को
सूचना दी—
"महाशयगण, सिराजुद्दौला ख़तम हो चुका। नवाब उसकी जान
बख़्शना चाहता था, किन्तु नवाब के पुत्र मीरन और 'बड़े लोगों' ने देश के
अमन के लिए उसे मार डालना ज़रूरी समझा, क्योंकि उसके शहर के पास
आते ही ज़मींदार लोग बलवा करने लगे थे।”
निस्सन्देह इन 'बड़े लोगों' में सब से मुख्य क्लाइव था !
क्लाइव और उसके साथियों के दुष्कृत्यों पर परदा डालने के
[हाशिया: सिराजुद्दौला का] लिए अंगरेज़ इतिहास लेखकों ने आमतौर पर
[हाशिया: चरित्र] झूठे इलज़ामों और नई नई जालसाज़ियों द्वारा
सिराजुद्दौला के चरित्र को कलंकित करने का
पूरा पूरा प्रयत्न किया है। किन्तु सिराजुद्दौला की सच्चाई, उसकी
वीरता, उसके सौजन्य, उसकी योग्यता, उसकी दयानतदारी और
उसकी ईमानदारी में किसी तरह का भी सन्देह नहीं हो सकता ।
वास्तव में उसकी योग्यता के कारण ही इंगलिस्तान के ईसाई
'व्यापारियों' ने अपने और अपनी क़ौम के भावी हित के लिए उसका
नाश करना आवश्यक समझा। उसका वह ख़ज़ाना भी जो चाँदी,
सोने और जवाहरात से लबरेज़ था, इन विदेशियों के लिए काफ़ी
लालच की चीज़ थी। उसमें दोष भी थे और वे दोष थे—विदेशियों