भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०० भारत में अंगरेज़ी राज
की निगरानी में यह किश्तियाँ नदियां गईं। वहां से (अंगरेज़ी) जंगी
जहाज़ों की तमाम किश्तियों और अन्य किश्तियों को साथ लेकर, झंडे
फहराते हुए और विजय का बाजा बजाते हुए आगे बढ़ीं x x x इससे
पहले कभी भी अंगरेज़ क़ौम को एक साथ इतना अधिक नक़द धन कहीं
किसी लड़ाई में न मिला था।"*
बटवारे के समय छोटे से छोटे अंगरेज़ अफ़सर को कम से कम
[अमींचन्द के साथ] ४५,००० रु० दिए गए; किन्तु अपने हिन्दो-
[दग़ा] स्तानी मददगारों के साथ क्लाइव और उसके
साथियों ने फिर एक बार दग़ा की। इस तमाम
साज़िश में आदि से अन्त तक मुख्यतम हिस्सा अमींचन्द का था।
निस्सन्देह बिना अमींचन्द की सहायता के न बंगाल में अंगरेज़ों
का व्यापार इतना बढ़ पाता, न वे चन्दरनगर विजय कर सकते,
और न सिराजुद्दौला सूबेदारी की मसनद से उतारा जा सकता।
आज ही के दिन की आशा में अमींचन्द ने सिराजुद्दौला के भारतीय
दरबारियों और मुलाज़िमों को विदेशी अंगरेज़ों की ओर से रिश्वतें
देने में अपने धन को पानी की तरह बहाया था। अमींचन्द ने
- " . . . The committee by the 6th of July 1757 received, in coined
silver, 72,71,666 rupees. This treasure was packed up in 700 chests and
laden in 100 boats, which proceeded under the care of soldiers to Nadiya ;
from whence they were escorted by all the boats of the squadron and many
others, proceeding with banners displayed and music sounding, of a trium-
phal procession. . . . Never before did the English nation at one time
obtain such a prize in solid money."—Orme's History of Indostan, vol. ii.
pp. 187, 188.