भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ भारत में अंगरेज़ी राज
निकले। अगले दिन जब सिराजुद्दौला को इस छल का पता चला,
तो उसने क्लाइव और वाट्सन को इस घटना की सूचना देते हुए
दुख के साथ लिखा :-
" x x x इससे साफ़ धोखा साबित होता है और सन्धि तोड़ने का
इरादा ज़ाहिर होता है x x x ।
"खुदा का शुक्र है कि सन्धि मेरी ओर से भंग नहीं की गई, ख़ुदा
और रसूल के सामने हमने आपस में सुलह की थी और जो कोई पहले
उसका उल्लङ्घन करेगा अपने किए की सज़ा पावेगा।"
निस्सन्देह सिराजुद्दौला और उसके विपक्षियों के चरित्र में
आकाश पाताल का अंतर था। भोले सिराजुद्दौला ने क्लाइव के
'प्रेम भरे पत्रों' पर विश्वास करके हाल ही में अपनी आधी सेना
तक बरखास्त कर दी थी।
१२ जून को मीर जाफ़र की ओर से कलकत्ते पत्र पहुँचा, जिसमें
लिखा था कि "यहाँ सब काम तैयार है"। अगले दिन १३ जून
को अंगरेज़ी सेना ने कलकत्ते से कूच किया।
सिराजुद्दौला को भी अब मजबूर होकर अपनी सेना मैदान
में निकालनी पड़ी। सिराजुद्दौला की इतनी बेपरवाही और
उसका आत्मविश्वास झूठा न था। सिराजुद्दौला की सेना अब
भी क्लाइव और उसकी समस्त सेना को थोड़े से समय के अंदर
निर्मूल कर देने के लिए काफ़ी थी। किन्तु वही मीर जाफ़र इस
समय सिराजुद्दौला का प्रधान सेनापति था। पुराने हिन्दोस्तानी
रिवाज के अनुसार सिराजुद्दौला स्वयं मीर जाफ़र के महल में