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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 340

६० \qquad\qquad\qquad\qquad भारत में अंगरेज़ी राज
"मैं पहले भी लिख चुका हूँ और फिर लिखता हूँ कि यदि अंगरेज़
कम्पनी अपना व्यापार क़ायम करना चाहती है तो मुझे कोई ऐसी बात न
लिखी जावे जो हमारी सन्धि के अनुकूल न हो, × × × अगर आप मुझसे
लड़ाई करना नहीं चाहते तो मेरी मोहर लगी हुई और मेरी दस्तख़ती सन्धि
आप के पास है, जब कभी पत्र लिखना हो तो उसे देख कर उसके अनुसार
लिखिए × × × ।
"यदि आप शान्ति क़ायम रखना चाहते हैं तो सन्धिपत्र के विरुद्ध
कोई बात न लिखिए।"*
किन्तु इस दरमियान वाट्सन, क्लाइव, वाट्स और मीर जाफ़र
के बीच साज़िश क़रीब क़रीब पक चुकी थी।
[हाशिया: मीरजाफ़र के साथ] ४ जून सन् १७५७ ई० को आधी रात के बाद एक
[हाशिया: गुप्त सन्धि] ज़नानी पालकी में बैठ कर चोरी चोरी वाट्स ने
मीर जाफ़र के महल में प्रवेश किया। उसी रात को मीर जाफ़र ने
अंगरेज़ों के साथ एक गुप्त सन्धिपत्र पर दस्तख़त कर दिए।
इस सन्धिपत्र की १३ शर्तों का सार इस प्रकार है :—
जितने अधिकार सिराजुद्दौला ने अंगरेज़ों को दे रक्खे थे, मीर
जाफ़र सूबेदार बनने पर उन सबको क़ायम रक्खे। अंगरेज़ और
मीर जाफ़र दोनों में से किसी की जब कभी किसी तीसरे के साथ
लड़ाई हो तो दूसरा उसकी मदद करे। तमाम फ़्रांसीसी और
उनकी कोठियाँ अंगरेज़ों के हवाले कर दी जायँ और फ़्रांसीसियों
को बंगाल में न रहने दिया जाय। कलकत्ते की तबाही के हरजाने

  • Ive's Voyages, p. 142.