भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished727 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 339सिराजुद्दौला =६
सिराजुद्दौला =६
कभी पीठ नही दिखाई उससे जा मिलूँगा। उसे विश्वास दिला दो कि मैं
दिन दिन भर और रात रात भर चल कर उसकी मदद के लिए पहुँचूँगा और
जब तक मेरे पास एक आदमी भी बचेगा तब तक उसका साथ न छोडूंगा' ।"†
किन्तु चन्दरनगर अंगरेज़ों के हाथों में जाने के समय से
[हाशिया: फ्रांसीसियों के साथ] सिराजुद्दौला का हृदय बहुत कुछ सशंक हो गया
[हाशिया: . सन्धि का उल्लंघन] था। चन्दरनगर की विजय के बाद अंगरेज़ों
और फ्रांसीसियों के दरमियान जो सन्धि हुई
थी उसके विरुद्ध अंगरेज़ों ने सिराजुद्दौला के सामने अब यह एक
और नई माँग पेश की कि क़ासिमबाज़ार, ढाका, पटना, जूदा,
बालेश्वर इत्यादि में फ्रांसीसियों की जितनी कोठियाँ हैं और जितने
फ्रांसीसी आपके राज में हैं उन सबको आप हमारे सुपुर्द कर दें ।
फ्रांसीसियों को बंगाल के अंदर कोठियाँ बनाने और व्यापार करने
की इजाज़त ठीक उसी तरह दिल्ली सम्राट से मिली हुई थी जिस
तरह अंगरेज़ों को । अभी तक फ्रांसीसियों ने न कभी सम्राट या
उसके सूबेदार की किसी आज्ञा को भंग किया था और न उन्हें किसी
तरह का कष्ट पहुँचाया था। इसलिए अंगरेज़ों की इस बेजा माँग के
उत्तर में सिराजुद्दौला ने १४ अप्रैल को वाटसन को लिख दिया :—
† "He (Clive) wrote to Sirajuddowla in terms so affectionate that they
for a time lulled that weak prince into perfect security. The same courier
who carried this 'Soothing letter,' as Clive calls it, carried to Mr. Watts a
letter in the following terms : 'Tell Mir Jaffir to fear nothing. I will join him
with five thousand men who never turned their backs. Assure him, I will
march night and day to his assistance, and stand by him as long as I have a
man left.' "—Macaulay's Essay on Clive.