भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 34, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें८ पुस्तक प्रवेश
रिपोर्टों और काग़ज़ों से ही संग्रह करना पड़ता है, किन्तु कम्पनी के तमाम
प्रकाशित पत्रों के विषय में अंगरेज़ इतिहास लेखक जेम्स मिल, जो
इङ्गलिस्तान में कम्पनी के 'पत्र-व्यवहार विभाग' का प्रमुख रह चुका था
और जिसका ब्रिटिश भारत का इतिहास सब से अधिक प्रमाण माना
जाता है, लिखता है—
“कम्पनी के डाइरेक्टरों ने इस तरह की बातों और ख़बरों
को दबा देने में, जिन्हें वे प्रकाशित करना न चाहते थे, शुरू से
आख़ीर तक बड़ी चतुरता दिखाई है।”*
कप्तान कनिङ्गम की मशहूर किताब “सिखों के इतिहास” की सन्
१८४३ की एडीसन के विज्ञापन में पीटर कनिङ्गम लिखता है—
“हाल के ज़माने की हिन्दोस्तान की तारीख़ के लिए जो
छपी हुई सामग्री मिलती है वह इस तरह की नहीं है जिस पर
कोई इतिहास लेखक विश्वास कर सके। पार्लिमेण्ट के दोनों
हिस्सों, हाउस ऑफ़ कॉमन्स और हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स से जो
सरकारी काग़ज़ात जनता के सामने पेश किए जाते हैं, उनमें भी
उस समय की राजनैतिक दलबन्दी के हितों की दृष्टि से तब्दीलियाँ
कर दी गई हैं, या इस ग़लत ख़याल से कि सच्ची बात के खुल
जाने से लोगों के भावों को आघात न पहुँचे, काट छाँट कर दी
गई है।”†
- "Under the skill which the Court of Directors have all along
displayed in suppressing such information as they wished not to appear."—
James Mill.
† "The printed materials for the recent History of India are not of