भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलेखक की कठिनाइयां ७
प्रसिद्ध अंगरेज़ तत्ववेत्ता हरबर्ट स्पेन्सर ने लिखा है कि फ्रान्स का
एक बादशाह जब इतिहास की कोई पुस्तक पढ़ना चाहता था तो अपने
'लाइब्रेरियन से कहता था,—"मेरे झूठ बोलने वाले को ले आओ।" स्पेन्सर
लिखता है कि फ्रान्सीसी बादशाह का यह कहना बेजा न था। इसके बाद
आजकल के इतिहासों का ज़िक्र करते हुए स्पेन्सर लिखता है—
"राजाओं के शासन कालों, लड़ाइयों और इस तरह की
मामूली घटनाओं के अलावा जो आजकल की तमाम क़ौमों के
इतिहास में मिलती हैं, हमें सिवाय उन सन्धियों के जो तोड़ने
ही की ग़रज़ से की जाती हैं, उन सरकारी पत्रों के जो बेईमान
और झूठे अफ़सरों के हाथ के लिखे होते हैं, उन गप्पों से भरे
हुए ख़तों के जो दरबारियों द्वारा भेजे जाते हैं, और इसी तरह की
और चीज़ों के, कोई ऐसी बात नहीं मिलती जिस पर हम विश्वास
कर सकें। इस तरह की सामग्री से कोई भी सत्य का खोजी सत्य
का पता कैसे लगा सकता है ? × × × "*
सरकारी काग़ज़ों में झूठ
भारत में अंगरेज़ी राज का इतिहास ज़्यादातर ईस्ट इण्डिया कम्पनी की
love of truth can hardly co-exist with a strong political spirit. In all count-
ries where the habits of thought have been mainly formed by political life,
we may discover a disposition to make expediency the test of truth."—Lecky
in his Rationalism in Europe.
- "Beyond accounts of kings' reigns, of battles, and of incidents
named in the chronicles of all the nations concerned, we have nothing to
depend on but treaties made to be broken, despatches of corrupt and lying
officials, gossiping letters of courtiers and so forth. How from these ma-
terials shall we distil the truth? . . ."-Herbert Spencer's Facts and
Comments.