भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८८ भारत में अंगरेज़ी राज
चाहते थे। २६ अप्रैल तक वाट्स ने मीर जाफ़र को राज़ी करके
क्लाइव को पत्र लिखा कि—"मीर जाफ़र और उसके साथी नवाब
को मसनद से उतारने में अंगरेज़ों को मदद देने के लिए तैयार हैं"
और यह भी लिखा :—
"यदि आप इस दूसरी तरकीब को पसन्द करें जो उस तरकीब की
निसबत जो मैं इससे पहले लिख चुका हूं ज़्यादा आसान है, तो मीर जाफ़र
चाहता है कि आप अपनी तजवीज़ें लिख भेजें कि आप कितना धन और
कितनी ज़मीन चाहते हैं और सन्धि की क्या शर्तें होंगी।" *
क्लाइव ने इस समय फिर दोरुख़ी चाल चली। एक ओर उसने
सिराजुद्दौला को धोखे में रखने के लिए उसे एक
[हाशिया: क्लाइव के दो रुख़े] अत्यन्त प्रेम भरा पत्र लिखा और दूसरी ओर
[हाशिया: पत्र] मीर जाफ़र के लिए वाट्स की असली बात का
जवाब दिया। प्रसिद्ध इतिहास लेखक मैकॉले लिखता है :—
"क्लाइव ने सिराजुद्दौला को इतने प्रेमभरे शब्दों में पत्र लिखा कि उन
शब्दों के धोखे में आकर वह निर्बल नरेश फिर कुछ समय के लिए अपने तईं
पूरी तरह सुरक्षित समझने लगा। क्लाइव अपने इस पत्र को 'सान्त्वना देने
वाला पत्र' कहता है। जो हरकारा इस पत्र को लेकर गया वही एक दूसरा पत्र
वाट्स साहब के नाम लेकर गया, जिसमें लिखा था—'मीर जाफ़र से कह
दो कि किसी बात से न डरे। मैं पाँच हज़ार ऐसे सिपाही लेकर जिन्होंने
- "If you approve of this scheme, which is more feasible than the other,
I wrote about, he (Mir Jaffir) requests you will write your proposals of what
money, what land you want or what treaties you will engage in."—Watts'
letter to Calcutta dated 26th April, 1757.