भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिराजुद्दौला ८३
ज़िम्मेदार होंगे; x x x चंद रोज़ के अंदर मैं x x x और अधिक जहाज़
और सेना मँगा लूँगा और आपके मुल्क में ऐसी आग लगा दूँगा कि गंगा
का तमाम जल भी उसे बुझा न सकेगा। x x x"
वाट्सन ने अब अपना असली रूप धारण कर लिया।
९ फ़रवरी के सुलहनामे में सिराजुद्दौला ने यह
सिराजुद्दौला की वादा किया था कि अंगरेज़ों की तमाम कोठियाँ
सच्चाई और माल उन्हें वापस दे दिया जावेगा और
जिन अंगरेज़ों का नुक़सान हुआ है उनको सरकार की तरफ़
से हरजाना दे दिया जावेगा। ये वह 'शर्तें' थीं जिन्हें वाट्सन
ने 'दस दिन के अंदर' पूरा करने पर अब ज़ोर दिया। मामूली
अदालतों की डिगरियों की काररवाई होने में भी काफ़ी देर लगती
है। क्लाइव के नीचे लिखे पत्र से ज़ाहिर है कि सिराजुद्दौला पूरी
ईमानदारी और काफ़ी जल्दी के साथ अपने शाही वादों को पूरा कर
रहा था। ३० मार्च को चन्दरनगर से क्लाइव ने एक पत्र में लिखा:—
"सिराजुद्दौला ने जो सन्धि हमारे साथ की थी उसकी अधिकांश शर्तें
वह पूरी कर चुका है। तीन लाख रुपए वह हमें अदा कर चुका है और
बहुत सा माल और धन हमारी अनेक मातहत कोठियों में हमारे पास जमा
कराया जा चुका है और मुझे कोई संदेह नहीं कि नवाब के तमाम वादे
ठीक समय पर पूरे किए जावेंगे।"*
- " He (Sirajuddowlah) has fulfilled most of the articles of the treaty
made with us. The three lack of rupees are already paid and goods and
money to a considerable amount delivered up to us at our several subordi-