भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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चन्दरनगर की विजय अंगरेज़ों के लिए अत्यन्त उपयोगी
साबित हुई। इससे बंगाल के अंदर फ़्रांसीसियों का बल टूट गया
और नवाब से अंतिम निबटारा करने के लिए अंगरेज़ों के सामने
का मार्ग अधिक साफ़ हो गया।
वाट्सन ने अपने २५ फ़रवरी के उस पत्र में जिसका ऊपर
[हाशिया: सिराज़ुद्दौला को] ज़िक्र आ चुका है, सिराज़ुद्दौला को लिखा था
[हाशिया: धमकी] कि—"आप ख़ातिरज़मा रखिए, मैं सदा अपना
धर्म समझ कर शान्ति क़ायम रक्खूँगा।" इसी
पत्र में उसने लिखा था कि यह अफ़वाह कि अंगरेज़ फ़्रांसीसियों
पर हमला करने वाले हैं बिलकुल झूठ है। किन्तु इसके चंद रोज़
बाद ही जब सिराज़ुद्दौला ने ६ फ़रवरी की सन्धि के अनुसार
वाट्सन से सेना की सहायता माँगी तो उत्तर में वाट्सन ने तैयारी
करके और मौक़ा देखकर सिराज़ुद्दौला को लिखा कि :—
“कुछ दिन हुए मैंने पिछले महीने की २० तारीख़ को आपके पत्र का
उत्तर दे दिया है। मैं समझता हूँ वह अब तक आपको मिल गया होगा।
उसे पढ़कर आपको पूरी तरह विश्वास हो गया होगा कि फ़्रांसीसी वकील का
यह कहना, कि मेरा इरादा शान्ति भंग करने का है झूठ है × × × ।
“× × × किन्तु अब साफ़ कहने का समय आगया है। यदि आप
वास्तव में अपने देश में शान्ति बनाए रखना चाहते हैं और अपनी प्रजा को
आपत्ति और बरबादी से बचाना चाहते हैं, तो आज से दस दिन के अंदर
अपनी ओर से सन्धि की हरेक शर्त को पूरा कर दीजिये, ताकि मुझे शिकायत
का ज़रा भी मौक़ा न मिल सके, नहीं तो याद रहे नतीजों के लिए आप