भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिराजुद्दौला ७६
उसे लिखाने के लिए नवाब के मंत्री को रिशवत दी।* वह यह भी
लिखता है कि :-
“नवाब जिन पत्रों को अपने हुकुम से लिखवाता था उन्हें कभी पढ़ता
न था, इसके अलावा मुसलमान ( शासक ) कभी अपने हाथ से दस्तख़त
नहीं करते। जब लिफ़ाफ़ा बंद करके अच्छी तरह कस दिया जाता है तब
मंत्री नवाब से उसकी मोहर माँगता है और नवाब के सामने लिफ़ाफ़े पर
. मोहर लगाता है, कभी कभी एक नक़ली मोहर भी होती है।”†
इन सब कामों में मुर्शिदाबाद के दो जैन जगतसेठों का प्रभाव
और अर्मींचंद का धन, इन दोनों से अंगरेज़ों को काफ़ी मदद मिल
रही थी।
३ मार्च को क्लाइव ने सिराजुद्दौला को सहायता पहुँचाने के
बहाने अपनी सेना की बाग सँभाली। ७ मार्च को
चन्दरनगर पर उसने सिराजुद्दौला को लिख भेजा कि मैं सहायता
अंगरेज़ों का के लिए आता हूँ। अंगरेज़ों की तैयारी पूरी थी।
क़ब्ज़ा इस बीच बम्बई से भी कुछ सेना क्लाइव