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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 328, कुल 727 में से

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पृष्ठ 328

७८ भारत में अंगरेज़ी राज
वाट्स ने १० मार्च को नवाब के मंत्रियों को रिश्वत देकर
नवाब की ओर से वाट्सन के नाम एक पत्र भिजवाया जिसके अंत
में यह वाक्य था :—
“आप समझदार और उदार हैं, यदि आपका शत्रु शुद्ध हृदय से
आपकी शरण चाहे तो आप उसकी जान बख़्श दें, किन्तु आपको उसके
इरादों की पवित्रता के विषय में पूरी तसल्ली होनी चाहिये, यदि ऐसा न हो
तो जो कुछ आप ठीक समझें करें।”
इस पत्र की मूल फ़ारसी प्रति कहीं नहीं मिलती और अंगरेज़ी
तरजुमा जिसका ऊपर हिन्दी तरजुमा दिया गया है वाट्स का
किया हुआ है।
वाट्स का दूसरा साथी स्क्रैफ़टन साफ़ लिखता है कि इस पत्र
को लिखाने के लिए अंगरेज़ों ने नवाब के मंत्रियों को रिश्वतें देने में
काफ़ी रुपया ख़र्च किया।* इतिहास लेखक जीन लॉ लिखता है
कि वाट्स ने मुर्शिदाबाद में रिश्वतों और झूठे वादों का बाज़ार
इतना गरम कर रक्खा था कि :—
“नवाब की सेना के सब मुख्य मुख्य अफ़सर मीर जाफ़रअली ख़ाँ,
ख़ुदादाद ख़ाँ लट्टी और कई और × × × पुराने दरबार के सब वज़ीर × × ×
क़रीब क़रीब सब मंत्री, दरबार के मुहर्रिर, यहाँ तक कि हरमसरा के ख़ोजे
तक अंगरेज़ों की ओर थे। × × ×”†
इस पत्र के सम्बन्ध में जीन लॉ को विश्वास है कि वाट्स ने

  • Reflections, p. 70.
    † Bengal Records, vol. iii, p. 191.