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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 320

७० भारत में श्रंगरेजी राज
देश की ज़बान और रिवाजों को समझता हो, तो न केवल उसके ज़रिए ये
नई शर्तें ही मंज़ूर कराई जा सकती हैं, बल्कि और बहुत से इस तरह के
प्रकट या गुप्त कामों में भी, जो पत्र व्यवहार द्वारा इतनी अच्छी तरह नहीं हो
सकते, वह मनुष्य बहुत उपयोगी साबित हो सकता है।"
मुर्शिदाबाद के दरबार में साज़िशों का जाल पूरना श्रंगरेजों
के लिए अब और अधिक आसान हो गया और इन कामों के लिए
क़ासिम बाज़ार की कोठी का श्रंगरेज़ अफ़सर वाट्स, जिसकी
एक बार सिराजुद्दौला जान बख़्श चुका था एलची नियुक्त करके
भेजा गया । १६ फ़रवरी के एक पत्र में वाट्स को कम्पनी की ओर
से यह हिदायत की गई कि तुम ६ तारीख़ के सुलहनामे से बाहर
दस और नई शर्तें सिराजुद्दौला के सामने पेश करो । इन नई शर्तों
में इस तरह की शर्तें भी शामिल थीं, मसलन :-
नवाब के महकमें चुंगी का कोई मुलाज़िम श्रंगरेज़ों के किसी
दस्तख़ती माल पर यदि किसी तरह का महसूल मांग बैठे तो बिना
नवाब से शिकायत किए या सरकारी अदालतों तक पहुँचे
श्रंगरेज़ों को उसे स्वयं दंड देने का अधिकार हो । कम्पनी के
ज़िम्मे या किसी भी श्रंगरेज़ के ज़िम्मे यदि किसी भारतवासी का
कोई क़र्ज़ निकलता हो तो नवाब उसे अपने पास से अदा कर दे ।
जो अदालतें श्रंगरेज़ अपनी ओर से क़ायम करें उन्हें भारत-
वासियों को मुजरिम क़रार देने और उन्हें फाँसी देने तक का
अधिकार मिल जावे । नवाब से भेंट करने के समय श्रंगरेज़ों को
रिवाज के श्रनुसार किसी तरह की नज़र पेश न करनी पड़े ।