भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६८ भारत में अंगरेज़ी राज
इस हालत में नवाब सिराजुद्दौला ने ६ फ़रवरी सन् १७५७ ई०
[अलीनगर की] को अंगरेज़ों के साथ वह सन्धि स्वीकार की जो
[सन्धि] 'अलीनगर की सन्धि' के नाम से प्रसिद्ध है।
इस सन्धि की सात शर्तें ये थीं :—
( १ ) जितनी रिआयतें दिल्ली सम्राट ने अंगरेज़ों के साथ कर
रक्खी थीं वे सब फिर से मंज़ूर कर ली जावें।
( २ ) बंगाल, बिहार और उड़ीसा भर में जिस किसी माल के
साथ अंगरेज़ों का 'दस्तक' हो वह सब बिना महसूल आने जाने
दिया जावे।
( ३ ) कम्पनी की कोठियाँ और कम्पनी या उसके नौकरों या
असामियों का वह तमाम माल असबाब, जो नवाब ने ज़ब्त कर
लिया था वापस दे दिया जावे, और नवाब के आदमियों ने जो
कुछ माल लूट लिया था उसके बदले में एक नक़द रक़म दी जावे।
( ४ ) अंगरेज़ जिस तरह उचित समझें उस तरह कलकत्ते
की क़िलेबंदी कर लें।
( ५ ) अंगरेज़ों को सिके ढालने का अधिकार रहे।
( ६ ) नवाब और उसके मुख्य पदाधिकारी और मंत्री इस
सुलहनामे पर दस्तख़त करें।
( ७ ) अंगरेज़ क़ौम और अंगरेज़ कम्पनी की तरफ़ से ऐड-
मिरल वाटसन और करनल क्लाइव दोनों इस बात का वादा करें
कि जब तक नवाब की ओर से सन्धि का उल्लंघन न हो, तब तक
हम नवाब के राज में अमन से रहेंगे।