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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 317

सिराजुद्दौला ६७
समय सिराजुद्दौला और अंगरेज़ों के बीच हुई उसके विषय में
रेनाल्ट अपने ४ सितम्बर के एक पत्र में लिखता है :—
"अंगरेज़ों ने अपनी सारी स्थल सेना और उसके साथ अपने जहाज़ों
के तमाम सिपाही लड़ने को भेज दिए। वे सोते हुए मुसलमानों के ऊपर
धोखा देकर अचानक टूट पड़े, फिर भी इस लड़ाई से जितने लाभ की
उन्हें आशा थी उतना न हो सका। शुरू में वे शत्रु को थोड़ा सा पीछे हटा
पाए, किन्तु फिर ज्योंही सिराजुद्दौला ने अपनी सेना का एक भाग जमा कर
लिया, त्योंही अंगरेज़ों को ख़ुद पीछे हट जाना पड़ा। अँगरेज़ी सेना बेतरतीबी
के साथ पीछे को भागी और यह उनकी बड़ी खुशक़िस्मती थी कि वे अपने
क़िले की दीवारों के नीचे तोपों के सुरक्षित साए में पहुँच सके । इस लड़ाई
में अँगरेज़ों के क़रीब २०० आदमी काम आए ।”*
निस्सन्देह अंगरेज़ों को इस विश्वासघात का बदला देने के
योग्य नवाब के पास अब भी काफ़ी सेना थी, किन्तु और आगे
चल कर रेनाल्ट लिखता है :—
‘“नवाब के मंत्रियों ने जो प्रायः सभी अंगरेज़ों के तरफ़दार थे और
केवल सुलह कर लेना चाहते थे, इस मौक़े से फ़ायदा उठाकर नवाब को
सुलह के लिए मजबूर किया। दूसरी तरफ़ अपने सेनापतियों की बग़ावत से
लाचार होकर × × × नवाब ने देखा कि सुलह के लिए राज़ी हो जाने के
सिवा उसके पास और कोई चारा न था। उसे अत्यन्त कड़ी शर्तें स्वीकार
करनी पड़ीं।”

  • Ibid, vol. iii. p. 246.