भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ भारत में अंगरेज़ी राज
जो दो अंगरेज़ वकील क्लाइव ने इस अवसर पर नवाब के
पास भेजे और जो वास्तव में जासूसों का काम कर रहे थे, उनके
नाम वाल्श और स्क्रैफ़टन थे। एक और हिन्दोस्तानी देशद्रोही
राजा नवकृष्ण इस समय सिराजुद्दौला के दल में अंगरेज़ों के
जासूस का काम कर रहा था और उन्हें पल पल पर नवाब की
सब काररवाइयों की ख़बर देता रहता था।
नवाब के ख़ेमे के पास ही अंगरेज़ वकीलों के ख़ेमे डाल दिए
गए। पहले से जो हिदायतें उन्हें दे दी गई थीं उनके अनुसार
४ तारीख़ की रात को ये दोनों दूत सिराजुद्दौला से बातचीत करके
अपने ख़ेमे में आगए, इसके बाद सोने के बहाने उन्होंने ख़ेमों की
रोशनी बुझा दी और फिर अँधेरे में वहाँ से निकल कर ये लोग
अंगरेज़ों की ओर भाग आए। इसके बाद की घटना के विषय में
जीन लॉ लिखता है:—
“अगले दिन ५ फ़रवरी को सुबह ४ या ५ बजे गहरे कोहरे में करनल
क्लाइव ने अपनी सेना सहित नवाब के दल पर हमला किया और ये लोग
ठीक उस ख़ेमे पर आकर गिरे जिसमें पहले दिन शाम को अंगरेज़ वकील
नवाब से मुलाक़ात कर चुके थे। × × × सौभाग्य से नवाब उस समय
उस ख़ेमे में मौजूद न था। उसके एक दीवान को अंगरेज़ वकीलों पर पहले
ही कुछ संदेह हो चुका था और उसने नवाब को सलाह दी थी कि आप ज़रा
दूर एक दूसरे ख़ेमे में रात गुज़ारें।”
सिराजुद्दौला को, ऐसे समय में जब कि सुलह की बातचीत
जारी थी, इस विश्वासघात की कोई आशा न थी। जो लड़ाई इस