भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२ भारत में अंग्रेज़ी राज
को मिली । सिराजुद्दौला सेना लेकर मुर्शिदाबाद से बढ़ा और हुगली
के निकट आकर उसने अंगरेज़ सेनापति वाट्सन को इस मज़मून
का एक पत्र लिखा :—
“तुम लोगों ने हुगली का नगर ले लिया, उसे लूटा और मेरी प्रजा
के साथ युद्ध किया, इस तरह के काम व्यापारियों को शोभा नहीं देते,
इसलिए मैं मुर्शिदाबाद से चलकर हुगली के निकट आ गया हूँ। इसी
तरह मैं अपनी सेना सहित नदी को पार कर रहा हूँ और मेरी सेना का एक
भाग तुम्हारे पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। फिर भी यदि तुम चाहते हो कि
कम्पनी का कारबार पहले की तरह फिर से जम जाय और कम्पनी का व्यापार
चलने लगे, तो किसी बाअख्तियार आदमी को मेरे पास भेज दो। जो
अपनी इच्छाएं और आवश्यकताएं मुझे बता सके और इस मामले में
मुझसे पूरी तरह बातचीत कर सके। इस बात का परवाना जारी करने में
मुझे कोई संकोच न होगा कि कम्पनी की तमाम कोठियाँ उन्हें वापस दे
दी जायँ और जिन शर्तों पर वे इस मुल्क में पहले तिजारत करते थे उन्हीं
शर्तों पर आइन्दा करते रहें। जो अंगरेज़ इन सूबों में बसे हुए हैं वे यदि
व्यापारियों का सा बर्ताव करेंगे, मेरी आज्ञाओं का पालन करेंगे और मुझे
किसी तरह दिक़्क़ न करेंगे, तो तुम विश्वास रखो मैं उनके नुक़सानों का
ख़याल करूँगा और इस बारे में उनकी तसल्ली कर दूँगा ।
“तुम जानते हो, जंग में सिपाहियों को लूटने से रोकना कितना मुश्किल
काम है। इसलिए यदि मेरी सेना की लूट द्वारा तुम लोगों का कुछ नुक़-
सान हुआ है और उसमें से कुछ यदि तुम लोग अपनी ओर से छोड़ दोगे
तो तुम्हारी दोस्ती लाभ करने के लिए और भविष्य में तुम्हारी क़ौम के साथ