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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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गया था। अंगरेज़ों को मालूम था कि सिराजुद्दौला ने हुगली के
पास नाज की बड़ी बड़ी कोठियाँ भर रक्खी हैं। तय हुआ कि सब
से पहले इन तमाम कोठियों को जाकर आग लगा दी जाय। †

हुगली का क़िला अरक्षित पड़ा हुआ था और माल भी वहाँ बहुत
[मार्जिंन नोट: हुगली की लूट और क़त्ले आम] था। क़िला आसानी से अंगरेज़ों के हाथों में
आ गया। ११ जनवरी का दिन क़िले के नज़दीक
के मकानों को लूटने में ख़र्च हुआ। इसके बाद
फिर १२ से १८ तक पूरे सात दिन हुगली नगर
और उसके आस पास की तमाम हिन्दोस्तानी रिआया के घरों को
लूटने में ख़र्च किए गए। इस लूट के साथ साथ हुगली के बेशुमार
निहत्थे और निरपराध हिन्दोस्तानी बाशिन्दे क़त्ल कर डाले गए।

सिराजुद्दौला को मालूम हो गया कि मेरे आदमियों में विश्वास
[मार्जिंन नोट: सिराजुद्दौला का आगे बढ़ना और वाटसन के नाम पत्र] घात के बीज बोकर अंगरेज़ों ने बजबज, तान्नाह,
कलकत्ता और हुगली के क़िले मुफ़्त ही में ले
लिए हैं। एस० सी० हिल लिखता है कि मुर्शिदा-
बाद के मुख्य मुख्य दरबारियों को अपनी ओर
मिलाने के लिए उनके साथ क्लाइव का गुप्त पत्र व्यवहार बराबर
जारी था। बहुत सम्भव है इस पत्र व्यवहार की भी कुछ भनक
सिराजुद्दौला के कानों तक पहुँच गई हो। इसके बाद हुगली की
निरपराध प्रजा के ऊपर अंगरेज़ों के जुल्मों की ख़बर सिराजुद्दौला


† Bengal in 1756–57, vol. i. p. cxxxviii.