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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 309

सिराजुद्दौला ५६
कलकत्ते से कुछ नीचे बजबज में एक अत्यन्त मज़बूत पुराना
[बजबज में दिखा- क़िला था, जिसके चारों ओर एक गहरी खाई
वटी लड़ाई] थी। यह क़िला राजा मानिकचंद के सुपुर्द था।
२६ दिसम्बर को क्लाइव के अधीन थोड़ी सी
अंगरेज़ी सेना जहाज़ से उतर कर बजबज पहुँची। अंगरेज़ों और
मानिकचंद के बीच पहले से तय हो चुका था कि मानिकचंद केवल
दिखाने के लिए एक बार अंगरेज़ों का मुक़ाबला करे। चुनाँचे
मानिकचंद दो हज़ार सैनिक लेकर क्लाइव के २६० सैनिकों का
मुक़ाबला करने के लिए क़िले से बाहर निकला। केवल आध घंटे की
झूठी फटफट के बाद मानिकचंद ने क़िले के दरवाज़े खोल दिए और
बिना किसी रुकावट के २६ दिसम्बर की रात को अंगरेज़ी सेना ने
बजबज के ज़बरदस्त क़िले में प्रवेश किया। मानिकचंद अपनी सेना
लिए पीछे की ओर हटता चला गया। मानिकचंद कायर न था।
छै साल बाद कम्पनी ने राजा मानिकचंद के एक बेटे को अपने
यहाँ तनख़्वाह देकर नौकर रखा, जिसकी वजह सरकारी काग़ज़ात
में इन साफ़ शब्दों में दी हुई है—"क्योंकि पिछले ३० साल के
अंदर मानिकचंद कई तरह से हमारे लिए उपयोगी साबित हो
चुका था।"*
बजबज के क़िले के अंदर जितने मामूली ग़ैर फ़ौजी हिन्दुस्तानी
थे, उनमें से कुछ भाग निकले और जो रहे उनको अंगरेज़ों ने क़त्ल
कर दिया ?

  • Rev. Long's Selections from the Government Records.