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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 308

५८ भारत में अंगरेज़ी राज
अक्तूबर के मध्य में ८०० यूरोपियन और १३०० हिन्दोस्तानी
[हाशिया: बंगाल में अंगरेज़ों का फिर से प्रवेश] सिपाही मद्रास से रवाना किए गए। जल सेना
का अधिकार ऐडमिरल वाट्सन को और स्थल
सेना का सुप्रसिद्ध करनल क्लाइव को दिया
गया। मद्रास की अंगरेज़ कौंसिल के मेम्बरों ने १३ अक्तूबर के एक
पत्र में इस सेना के अफ़सरों को खुले आदेश दिया कि आप लोग
बंगाल पहुँच कर नवाब के आदमियों को अपनी ओर फोड़कर
किसी दूसरे को नवाबी का हक़दार खड़ा करके और अन्य हर
तरह के उपायों और षड्यन्त्रों द्वारा नवाबी को पलट देने का प्रयत्न
करें।* इस प्रकार बंगाल में ग़दर करवाने के इरादे से दिसम्बर
सन् १७५६ के मध्य में यह सेना फल्ता पहुँच गई ।
यह सैन्यबल भी बहुत दरजे तक केवल एक दिखावे की चीज़
थी। असली चीज़ साज़िशों का वह जाल था जो
[हाशिया: साज़िशों का जाल] बंगाल में पूरी तरह फैल चुका था। कलकत्ते का
राजा मानिकचंद भी किसी न किसी लालच में
फंस कर अपने स्वामी और देश दोनों के साथ विश्वासघात करने
को राज़ी हो गया। फल्ता पहुँचते ही क्लाइव और वाट्सन दोनों ने
नवाब के नाम अलग अलग दो लम्बे पत्र लिखे, जिनमें सिवाय
धमकियों, छल और बदतमीज़ी के और कुछ न था। सिराजुद्दौला
इन पत्रों का क्या उत्तर दे सकता था ? और अंगरेज़ों को भी
सिराजुद्दौला के जवाब का कहाँ इन्तज़ार था ?

  • Letter dated 13th October 1756. Bengal in 1756-57, vol. i, pp. 239, 240.