भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ भारत में अंग्रेज़ो राज
इस पर जीन लॉ लिखता है :-
“सिराजुद्दौला यूरोपनिवासियों को बहुत ही ज़्यादा हक़ीर और तुच्छ
समझता था । वह कहा करता था कि इन्हें ठिकाने रखने के लिये केवल एक
जोड़ी चप्पल की ज़रूरत है । × × × इसलिए वह यह सोच ही न सकता
था कि अंग्रेज़ सैन्यबल द्वारा फिर से बंगाल में पैर जमाने का विचार कर
सकते हैं । यदि वह यह अनुमान भी कर सकता था कि अंग्रेज़ कोई नई
तरकीब सोच रहे होंगे तो केवल यह अनुमान कर सकता था कि वे विनम्र
होकर एक हाथ से मेरे सामने नज़र पेश करेंगे और दूसरे हाथ से फिर
अपनी तिजारत शुरू करने के लिए खुशी के साथ मेरा फ़रमान हासिल
करेंगे । निस्संदेह इसी ख़याल से सिराजुद्दौला ने अंग्रेज़ों को शांतिपूर्वक
फलता में पड़े रहने दिया ।”*
फलता में अंग्रेज़ों ने नवाब के अफ़सरों से यह कहा कि हमें
मौसम ख़राब होने की वजह से यहाँ रुकना पड़
सिराजुद्दौला के रहा है और ज्योंही मौसम समुद्र यात्रा के
साथ छल क़ाबिल हुआ हम मद्रास चले जायँगे । दूसरी
ओर उन्होंने “नवाब को धोखा देने के स्पष्ट उद्देश से”† अत्यन्त
दीन और नम्र शब्दों में इस मज़मून की अर्ज़ियाँ सिराजुद्दौला
के पास भेजनी शुरू कर दीं कि हमें फिर से बंगाल में व्यापार करने
की इजाज़त दी जाय ।
- Bengal in 1756—57, vol. iii. p. 176.
† “To deceive the Nawab…………” S. C. Hill in Bengal in 1756—57.
vol. i, pp. cxi, cxv.