भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिराजुद्दौला ५३
चट कर लिए। अब मीर जाफ़र को बदनाम करना उसके लिए
ज़रूरी हो गया। इसलिए कम्पनी के डाइरेक्टरों के नाम उसने एक
लम्बा पत्र लिखा, जिसमें मीर जाफ़र को उसने घोर अन्यायी और
हत्यारा बयान किया और अनेक ऐसे पुरुषों और स्त्रियों की एक
सूची साथ में दी, जिन्हें वह लिखता है कि मीर जाफ़र ने बेक़सूर
मार डाला। प्रत्येक पुरुष के पिता का नाम और प्रत्येक स्त्री के
पति का नाम सूची में दिया गया। छोटी से छोटी तफ़सील तक
इन हत्याओं की हॉलवेल के पत्र में मौजूद है। इसके कई साल बाद
क्लाइव और उसके साथियों ने डाइरेक्टरों को एक और पत्र भेजा
जिसमें उन्होंने बताया कि मीर जाफ़र पर जितने इलज़ाम हॉलवेल
ने लगाए हैं वे सब सर से पाँव तक झूठे हैं और जिन पुरुष स्त्रियों
की सूची हॉलवेल ने अपने पत्र में दी है यह कह कर कि मीर जाफ़र
ने इन लोगों को बेक़सूर मारडाला उनमें से दो को छोड़कर बाक़ी
सब अभी तक ज़िंदा हैं।*
फिर भी सिराजुद्दौला को बदनाम करने और अपने देशवासियों
के काले कारनामों पर मुलम्मा फेरने के लिए उस समय से आज
तक अंग्रेज़ इतिहास लेखकों ने हॉलवेल की ब्लैक होल नामक
कल्पना से पूरा फ़ायदा उठाया है। अंग्रेज़ी स्कूलों की समस्त
पाठ्य पुस्तकों में, जिनमें कि अंग्रेज़ों के ऊपर सिराजुद्दौला के
बेशुमार अहसानों का कहीं ज़िक्र नहीं, उनमें यह क़िस्सा सच्चा
कह कर बयान किया जाता है।
- Letter to the Directors, dated 1st October, 1765, by Clive and others.