भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 293, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंसिराजुद्दौला ४५
अपनी ओर फोड़ लेना। वही वाट्स और उसके अंगरेज़ साथी,
जिनकी सिराजुद्दौला ने जानें बख़्शी थीं, इस समय सिराजुद्दौला
की सेना के अन्दर इस प्रकार की साज़िशों के जाल पूर रहे थे।
सिराजुद्दौला की सेना में और ख़ासकर उसके तोपख़ाने में
अनेक यूरोपियन और अन्य ईसाई नौकर थे।
[हाशिया: ईसाई पादरियों के फ़तवे] ईसाई पादरियों के दस्तख़तों से एक दूसरे के
बाद तीन व्यवस्थापत्र यानी फ़तवे निकाले गए,
जिनमें लिखा था कि किसी भी ईसाई धर्मावलम्बी के लिए मुसलमानों
का पक्ष लेकर अपने सहधर्मियों के ख़िलाफ़ लड़ना ईसाई धर्म के
विरुद्ध और महापाप है। ये फ़तवे गुप्त ढंग से सिराजुद्दौला के ईसाई
मुलाज़िमों में बाँटे गये। इन्हीं फ़तवों में सिराजुद्दौला के मुलाज़िमों
को यह भी लालच दिया गया कि यदि तुम नवाब की सेना से
भाग कर अंगरेज़ों की ओर चले आश्रोगे, तो तुम्हें फ़ौरन अंगरेज़ी
सेना में नौकर रख लिया जायगा। इस तरह की चालों द्वारा काफ़ी
नमकहराम सिराजुद्दौला की सेना में पैदा कर दिए गए।
कलकत्ते के अंगरेज़ों का व्यवहार इस अवसर पर अपने हिन्दो-
स्तानी मददगारों के साथ अत्यन्त ख़राब था।
[हाशिया: अपने हिन्दोस्तानी मददगारों के साथ व्यवहार] सिराजुद्दौला के आने की ख़बर पाते ही इन लोगों
ने कलकत्ते के तमाम हिन्दू और मुसलमानों को,
जिनमें अधिकतर कम्पनी के मुलाज़िम, गुमाश्ते,
व्यापारी और मज़दूर थे अरक्षित छोड़ दिया और उनसे कह दिया कि
अंगरेज़ तुम्हारी रक्षा न करेंगे। किन्तु यूरोपियनों, हिन्दोस्तानी