भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसिराजुद्दौला ३३
मनुष्य के पास जितनी सम्पत्ति हो सकती है उससे बेइंतहा ज़्यादा सम्पत्ति
मुर्शिदाबाद में अनेक के पास है।”*
हिन्दुओं और मुसलमानों के साथ सूबेदार के व्यवहार में
किसी तरह का भेदभाव न था। सूबेदार के अधीन तीनों प्रान्तों में
अधिकांश रियासतों का शासन हिंदू राजाओं के हाथों में था।
मुर्शिदाबाद के दरबार में अनेक उच्च से उच्च पद हिन्दुओं को मिले
हुए थे। एस० सी० हिल लिखता है कि “देश का व्यापार और
दस्तकारियाँ क़रीब क़रीब सब हिन्दुओं ही के हाथों में थीं।”†
अंगरेज़ जाति के लोग सब से पहिले भारत के पच्छिमी तट
[हाशिया: बंगाल को लूटने] पर उतरे, किन्तु उनकी राजनैतिक सत्ता की
[हाशिया: की योजना] नींव पहले पहल बंगाल में पड़ी। इसके दो सबब
बताए जा सकते हैं। सब से पहला और मुख्य
सबब यह था कि जब कि पच्छिमी तट पर मराठों की विशाल
जल सेना उस समय मौजूद थी, जो अपने समय में संसार की
सब से ज़बरदस्त जल सेना मानी जाती थी, मुग़लों के पास
कोई जल सेना थी ही नहीं और बंगाल का दरवाज़ा समुद्र से
आने वालों के लिए चौपट खुला हुआ था। दूसरा सबब यह था
कि पच्छिमी प्रान्तों की निस्बत बंगाल कहीं अधिक उपजाऊ और
- "The city of Murshidabad is as extensive, populous, and rich as the
city of London; with this difference that there are individuals in the first
possessing infinitely greater property than any of the last city. "—Clive.
† Bengal in 1756-57, Introduction.